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Sunday, 1 March 2020

टेक्नोलॉजी के दोस्त बनें गुलाम नहीं

टेक्नोलॉजी के दोस्त बनें गुलाम नहीं

टेक्नोलॉजी के दोस्त बनें गुलाम नहीं-santalivideos.com
                  image by - pixabay
दिन - ब - दिन स्मार्टफोन पर हमारी निर्भरता बढ़ती जा रही है . जो काम हमारे दिमाग को करना चाहिए , उन कामों के लिए भी हम स्मार्टफोन पर निर्भर होते जा रहे हैं . मोबाइल नंबर , जरूरी कामों की सूची , पासवर्ड , खास तारीखें आदि कई जरूरी चीजें स्मृति पटल में संजोने के बजाय हम स्मार्टफोन में स्टोर कर रहे हैं . इसका सीधा असर हमारी स्मृति पर पड़ रहा है . हम अपनी स्मृति क्षमता खो रहे हैं . जो चीजें पहले हमें याद थीं , उन्हें भी भूल रहे हैं . उन्हें याद करने का प्रयास भी नहीं करते . हम यह भूल रहे हैं कि दिमाग में स्टोर डाटा कभी नहीं मिटता . कुछ भी याद करने के लिए बस दिमाग पर थोड़ा जोर डालना होता है , पर अगर स्मार्टफोन खराब या गुम हो जाये , तो सारी मेमोरी करप्ट हो जाती है . अतः बेहतर होगा कि हम अपने दिमाग - का - ज्यादा से - ज्यादा इस्तेमाल करें . इसके लिए कुछ प्रमुख बातों पर ध्यान देना जरूरी है । दिमाग में बनाएं सूची : जरूरी सामानों की सूची हो या जरूरी कामों की , आजकल सब स्मार्टफोन पर ही बना कर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर खोल कर देख लेते हैं . दिमाग पर जोर डालते ही नहीं . इससे धीरे - धीरे दिमाग की क्षमता कम हो रही है . बेहतर होगा इन सारी चीजों या बातों को अपने दिमाग में ही सूचीबद्ध रखने की आदत डालें .

खुद याद रखें तारीखें पहले किसी का जन्मदिन हो या शादी की साल गिरह , हमारे दिमाग में वह तारीख लॉक रहती थी , पर उसके लिएभी अब हम स्मार्टफोन में रिमाइंडर सेट करके रखते हैं . बेहतर होगा अभी तक आपने जितनी भी तारीखें स्मार्टफोन में स्टोर की हैं , उन्हें अपने मेमोरी में सेव कर लें और फिर फोन से डिलीट कर दें .
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इ - बुक की बजाय पलटें किताब के पन्ने आजकल ई - बुक का प्रचलन जोरों पर हैं . लोग किताबों को किंडल या स्मार्टफोन पर पढना पसंद करते हैं , ज्यादा देर स्मार्टफोन यूज करने से आंखों को नुकसान पहुंचता है . इस आदत को बदलें . किताबों के पन्ने पलटने की आदत डालें . किताबें स्मार्टफोन से ज्यादा सुरक्षित हैं .

फोन नंबर डायल करने की आदत डालें
पहले किसी को कॉल करने के लिए हम उसका कॉन्टैक्ट नंबर डायल करते थे इस कारण कई सारे नंबर हमें मुंहजबानी याद हो रहते थे और आपात स्थिति में उनसे संपर्क कर लेते थे , पर स्मार्टफोन ने हमारी इस आदत को खराब कर दिया . अब हमें किसी को कॉल करने के लिए फोन कॉन्टैक्ट लिस्ट में उसका नाम देख कर डायल कर लेते हैं . अपनी इस आदत को बदलने का अभ्यास करें . जरूरी कॉन्टैक्ट नंबर्स को जरूर याद करके रहें .

दिमाग ज्यादा सुरक्षित है
स्मार्टफोन से यह बात हमेशा याद रखें कि आपका डाटा आपके दिमाग में ज्यादा सुरक्षित है . एटीएम पिन , अकाउंट नंबर , पासवर्ड जैसे निजी डाटा स्मार्टफोन में सेव रखने की बजाय दिमाग में सेव करके रखें . हर काम के लिए स्मार्टफोन पर हमारी निर्भरता हमें इसका गुलाम बना रही है . स्मार्टफोन हमारी जरूरत का हिस्सा है . इसे अपनी आदत न बनाएं . सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही इसका उपयोग करें

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